शुक्र. अप्रैल 4th, 2025 12:33:24 PM
  • आंकड़ों एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा आयोजित टाइम यूज सर्वे (TUS) 2024 के अनुसार, महिलाओं की वेतनभोगी रोजगार और देखभाल संबंधी गतिविधियों में भागीदारी में वृद्धि हुई है।

समय उपयोग सर्वेक्षण

  • समय उपयोग सर्वेक्षण (TUS) यह मापता है कि जनसंख्या विभिन्न गतिविधियों में अपना समय कैसे व्यतीत करती है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य पुरुषों और महिलाओं की सशुल्क (Paid) और निःशुल्क (Unpaid) गतिविधियों में भागीदारी को मापना है।

समय उपयोग सर्वेक्षण 2024:

  • अवधि: जनवरी – दिसंबर 2024
  • कवरेज:1.3 लाख घरों (ग्रामीण और शहरी) के 4.5 लाख से अधिक लोगों को शामिल किया गया।प्रत्येक चयनित घर के 6 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी सदस्यों से जानकारी एकत्र की गई।
  • जारी करने वाला संगठन:सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI),राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), MoSPI
  • पिछले सर्वेक्षण:पहला अखिल भारतीय समय उपयोग सर्वेक्षण: जनवरी – दिसंबर 2019,दूसरा अखिल भारतीय सर्वेक्षण: जनवरी – दिसंबर 2024

समय उपयोग सर्वेक्षण 2024: मुख्य निष्कर्ष

  • कार्यबल भागीदारी में वृद्धि:महिलाओं की रोजगार संबंधी गतिविधियों में भागीदारी 2019 में 21.8% से बढ़कर 2024 में 25% हो गई।पुरुषों की भागीदारी 70.9% से बढ़कर 75% हो गई।यह महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में वृद्धि को दर्शाता है, हालांकि श्रम बल भागीदारी में लैंगिक अंतर अभी भी बना हुआ है।
  • अवैतनिक घरेलू कार्यों में समय की कमी:महिलाओं ने अवैतनिक घरेलू कार्यों में 2019 में 315 मिनट से घटकर 2024 में 305 मिनट प्रतिदिन व्यतीत किए।पुरुषों द्वारा ऐसे कार्यों में दिया गया समय सिर्फ 88 मिनट प्रतिदिन रहा।यह बदलाव महिलाओं के सशुल्क कार्यों की ओर बढ़ने का संकेत देता है।
  • महिलाओं की देखभाल (Caregiving) में प्रमुख भूमिका:15-59 वर्ष की आयु की 41% महिलाएँ देखभाल संबंधी गतिविधियों में शामिल रहीं, जबकि पुरुषों का प्रतिशत 21.4% ही रहा।महिलाएँ प्रतिदिन 137 मिनट देखभाल कार्यों में बिताती हैं, जबकि पुरुष केवल 75 मिनट देते हैं।

सकारात्मक रुझान और चुनौतियाँ:

सकारात्मक रुझान:

  • महिलाओं की कार्यबल भागीदारी में वृद्धि: महिलाओं की रोज़गार दर 2019 में 8% से बढ़कर 2024 में 25% हो गई, जो सशुल्क कार्यों की ओर बदलाव को दर्शाती है।
  • अवैतनिक घरेलू कार्यों में कमी: महिलाओं के अवैतनिक घरेलू कार्यों में प्रतिदिन 10 मिनट की कमी आई, जिससे लैंगिक संतुलन की ओर प्रगति हुई है।
  • देखभाल की ज़िम्मेदारियों को अधिक मान्यता: पुरुषों और महिलाओं दोनों की देखभाल कार्यों में भागीदारी बढ़ी, जिससे परिवारों में इसकी महत्ता को पहचान मिली।
  • सांस्कृतिक और मनोरंजन गतिविधियों में वृद्धि: संस्कृति, मीडिया और खेल पर खर्च किया गया समय 9% से बढ़कर 11% हो गया।
  • बच्चों में सीखने की गतिविधियों में वृद्धि: 6-14 वर्ष के 3% बच्चे प्रतिदिन 413 मिनट सीखने की गतिविधियों में व्यतीत कर रहे हैं, जो मजबूत शैक्षिक सहभागिता को दर्शाता है।

नकारात्मक पहलू और चुनौतियाँ:

  • घरेलू कार्यों में लैंगिक असमानता: महिलाएँ पुरुषों की तुलना में 201 मिनट अधिक अवैतनिक घरेलू कार्यों में व्यतीत करती हैं, जो गहरे सामाजिक-पारिवारिक मानदंडों को दर्शाता है।
  • युवाओं में सीखने के समय में गिरावट: पुरुषों की सीखने की गतिविधियों में 11 मिनट और महिलाओं की 10 मिनट की कमी आई, जिससे शिक्षा में संभावित गिरावट देखी गई।
  • पुरुषों की देखभाल कार्यों में सीमित भागीदारी: केवल 4% पुरुष देखभाल संबंधी कार्यों में शामिल हुए, जबकि महिलाओं की भागीदारी 41% रही, जिससे महिलाओं पर देखभाल का अधिक बोझ बना हुआ है।

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