गुरु. अप्रैल 3rd, 2025 9:23:23 PM

योजना की समग्र प्रगति की समीक्षा के लिये अटल भूजल योजना (ATAL JAL) की राष्ट्रीय स्तरीय संचालन समिति (NLSC) की 5वीं बैठक आयोजित की गई।विश्व बैंक कार्यक्रम की समीक्षा में शामिल हो गया है। समिति ने राज्यों को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में जल सुरक्षा योजनाओं (Water Security Projects- WSP) को एकीकृत करने के लिये प्रोत्साहित किया जो कार्यक्रम के पूरा होने के बाद भी योजना के दृष्टिकोण की स्थिरता सुनिश्चित करेगा।

अटल भूजल योजना

  • अटल जल एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जिसका उद्देश्य  6000 करोड़. रुपए के परिव्यय के साथ स्थायी भूजल प्रबंधन की सुविधा प्रदान करना है।
  • इसका कार्यान्वन जल शक्ति मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
  • विश्व बैंक और भारत सरकार योजना के वित्तपोषण के लिये 50:50 के अनुपात का योगदान दे रहे हैं।
  • विश्व बैंक का संपूर्ण ऋण राशि और केंद्रीय सहायता राज्यों को अनुदान के रूप में दी जाएगी।
  • इसका उद्देश्य चिन्हित राज्यों में संबंधित जल संकट वाले क्षेत्रों में भूजल संसाधनों के प्रबंधन में सुधार करना है। ये राज्य गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश हैं।
  • अटल जल मांग-पक्ष प्रबंधन पर प्राथमिक केंद्र के साथ पंचायत के नेतृत्व वाले भूजल प्रबंधन और व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करेगा।

भारत में भूजल की कमी की स्थिति

  • भारत में भूजल की कमी एक गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि यह पेयजल का प्राथमिक स्रोत है। भारत में भूजल की कमी के कुछ मुख्य कारणों में सिंचाई, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के लिये भूजल का अत्यधिक दोहन शामिल है।
  • हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में भूजल का सबसे अधिक उपयोग भारत द्वारा किया जाता है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के संयुक्त भूजल के उपयोग से भी अधिक है।
  • भारत के केंद्रीय भूजल बोर्ड (Central Ground Water Board- CGWB) के अनुसार, भारत में उपयोग किये जाने वाले कुल जल का लगभग 70% भूजल स्रोतों से प्राप्त होता है।
  • हालाँकि CGWB का यह भी अनुमान है कि देश के कुल भूजल निष्कर्षण का लगभग 25% असंवहनीय है, अर्थात पुनर्भरण की तुलना में निष्कर्षण दर अधिक है।
  • समग्र रूप से भारत में भूजल की कमी एक गंभीर समस्या है जिसे बेहतर सिंचाई तकनीकों जैसे संवहनीय जल प्रबंधन अभ्यासों और संरक्षण प्रयासों के माध्यम से उजागर करने की आवश्यकता है।

भारत में भूजल की कमी के प्रमुख कारण

सिंचाई के लिये भूजल का अत्यधिक दोहन

  • भारत में कुल जल उपयोग में सिंचाई की हिस्सेदारी लगभग 80% है और इसमें से अधिकांश जल भूमि से प्राप्त होता है।
  • खाद्यान्न की बढ़ती मांग के साथ सिंचाई हेतु भूजल का अधिकाधिक निष्कर्षण किया जा रहा है, जिससे इसके स्तर में कमी आ रही है।
  • संयुक्त राष्ट्र की इंटरकनेक्टेड डिज़ास्टर रिस्क रिपोर्ट, 2023 के अनुसार, पंजाब में 78% कुओं को अतिदोहित घोषित किया गया है और पूरे उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में वर्ष 2025 तक गंभीर रूप से अल्प भूजल उपलब्धता का अनुमान है।

जलवायु परिवर्तन

  • बढ़ते तापमान एवं वर्षण के बदलते प्रतिरूप भूजल जलभृतों (Groundwater Aquifers) की पुनर्भरण दरों को परिवर्तित कर सकते हैं, जिससे भूजल स्तर में और कमी आ सकती है।
  • सूखा, फ्लैश फ्लड और बाधित मानसूनी घटनाएँ जलवायु परिवर्तन की घटनाओं के हालिया उदाहरण हैं जो भारत के भूजल संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

अव्यवस्थित जल प्रबंधन

  • जल का कुशलता से उपयोग न करना, जल के पाइपों का फटना और वर्षा जल को एकत्र करने तथा उसके भंडारण हेतु असुरक्षित बुनियादी ढाँचा, ये सभी भूजल की कमी में योगदान कर सकते हैं।

प्राकृतिक पुनर्भरण में कमी

  • वनों की कटाई जैसे कारकों से भूजल जलभृतों का प्राकृतिक पुनर्भरण कम हो सकता है, जिससे मृदा का क्षरण हो सकता है और भूमि में रिसने तथा जलभृतों को फिर सक्रिय करने में सक्षम जल की मात्रा कम हो सकती है।

Login

error: Content is protected !!